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Channel: ओझा उवाच
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उत्तम आहार - पशु आहार

 पिछले दिनों एक मित्र मिलने आये। शनिवार का दिन। आराम से पसर के बैठे। खाते-पीते बैकग्राउंड वाले हैं, तो जहाँ बैठें, अच्छा रेडियस घेर लेते हैं। दो-चार दिन पहले हमारी तबियत थोड़ी डाउन थी, तो उस सिलसिले में...

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सरल करें!

बचपन में किसी बात पर किसी को कहते सुना था – “अभी ये तुम्हारी समझ में नहीं आएगा। ये बात तब समझोगे जब एक बार खुद पीठिका पर बैठ जाओगे।” यादों का ऐसा है कि किस बात पर ये बात कही गयी थी वो अब याद नहीं,...

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रिटायरमेण्ट@45

[आदरणीय ज्ञानदत्त जी की पोस्ट रिटायरमेण्ट@45पोस्ट पढ़ने के बाद लगा कि दो-चार बातें कहनी चाहिए। तो उन बातों को … पढ़ा जाय।] १ पिछले कुछ वर्षों से मैं न्यू यॉर्क के दो विश्वविद्यालयों में ‘मशीन लर्निंग...

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मौसम नहीं, मन चाहिए!

[ट्विट्टर पर एक वायरल फोटो देख “where I need to study” मन में एक प्रश्न उठा कि ये सब भी लगता है पढ़ाई में? हमें तो लगता था पढ़ाई के लिए किताब चाहिए और मन चाहिए। पर मजा भी आया क्योंकि कई बातें याद आ...

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... गिरिजेश राव 🙏

गिरिजेश राव का जाना असहनीय है। उनकी कमी रहेगी। आजीवन। क्या समझें, क्या समझाएँ और क्या लिखें! वो ऐसे थे कि उनके नाम के आगे आचार्य स्वतः लग जाता है। उनको पढ़ने के साथ-साथ उन्हें  व्यक्तिगत रूप से जानना...

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हिन्दी

‘लेबंटी चाह’के एक प्रोग्राम में एक प्रश्न उठा: मैंने ‘लेबंटी चाह’ हिन्दी में क्यों लिखा? अंग्रेज़ी क्यों नहीं? काम करते हो न्यू यॉर्क में, पढ़ाते हो मशीन लर्निंग और किताब हिन्दी में!पौन घंटे के...

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छपना ‘लेबंटी चाह’ का

मेरे ब्लॉग की सबसे चर्चित पोस्टें हैं - पटना वाली। लोकप्रिय भी*। इन्हीं में से एक पोस्ट लेबंटी चाहभी है। लेमन-टी से बना लेबंटी और चाय से बना चाह। इसी नाम से अब उपन्यास छप कर आ रहा है।     पटना डायरी से...

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झाल कूटना

‘झाल’ अर्थात् झाँझ (झाल मुरी वाला झाल नहीं)। काँसे का बना हुआ ताल देने का वाद्य यंत्र जिसे मंजीरा भी कहते हैं। अब झाल वाद्य यंत्र है तो इसके साथ क्रिया होनी चाहिए बजाना अर्थात् ऐसे - झाल बजाना। वो होती...

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सुर्रियल पटना (पटना २३)

कल बीरेंदर को फ़ोन किए।फ़ोन उठाते ही बोला – ‘बीरेंदर स्पीकिंग।’मैंने पूछा कि ‘हैं? ये अंग्रेज़ी कब से बोलने लगे तुम? सब ठीक?’‘आरे नहीं भैया। सोचे कि थोड़ा स्टाइल मारे। चलिए इसी बहाने कुछ और बात करेंगे।...

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कॉन्सेप्चुअल फ्रेमवर्क

सामाजिक विज्ञान को विज्ञान की उपाधि जरूर किसी ऐसे व्यक्ति ने दी होगी जिसे लगा होगा कि विज्ञान को विज्ञान कहना डिस्क्रिमिनेशनहो चला है। विज्ञान और तार्किकता बूर्जुआ बन गए हैं। अतार्किकता को क्रांति कर...

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कंठस्थ

पिछले दिनों उड़ीसा में तूफ़ान आने के बाद हिंदी की ख़बरों में भी 'मिलियन'शब्द कई बार दिखा। फिर आजकल सोशल मीडिया के युग में फ़ालोअर, व्यूइत्यादि की गणना भी मिलियनमें ही होती हैं। ये एक छोटा उदहारण है कि...

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किस्सा-ए-बागवानी

[सत्य घटनाओं पर आधारित. इस पोस्ट के सभी पात्र और घटनाए लगभग वास्तविक हैं. यदि किसी भी व्यक्ति से इसकी समानता होती है तो ये और कुछ भी हो संयोग तो नहीं ही है. वैसे हमें कौन सा फर्क पड़ता है ! 😊]कुछ दिनों...

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मेंटल (पटना २२)

चाय की दुकान पर आना जाना होने से धीरे-धीरे दो चार अजनबी लोग भी चेहरे से जानने लगे थे और उन्हीं में से एक सज्जन ने एक दिन हमें निमंत्रण दे दिया - 'आप भी आईयेगा'। यूँ तो मैं जानने वालों के यहाँ भी...

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फगुआ

- फगुआक्यों बोल रहे हो. कैसा तो लगता है सुनने में. चीप. होली बोलो.- चीप? 'चीप'भी  कैसा तो चीप लगता है सुनने में फूहड़ बोलो. फगुआ इसलिए क्योंकि बात फगुआकी हो रही हो तो उसे होली कैसे कहें?- दोनों एक ही तो...

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तीन सामयिक बातें

तीन बातें का मतलब तीन ही नहीं, अब शीर्षक कुछ तो रखना पड़ेगा न ...बातें निकलेगी तो एक दुसरे से लिंकित होते दूर तलक जाए या आस-पास ही मंडराती रहे ...तीन पर तो नहीं ही रुकने वाली। पढ़ते हुए जहाँ भी लिंक मिले...

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सीट नं ६३

बनारस से बलिया जितना पास है जाने के पहले उतना ही ज्यादा सोचना पड़ता है  - व्युत्क्रमानुपात में. इतनी कम दुरी है कि यात्रा तो सड़क से ही करनी चाहिए। ..पर सड़क से की गयी यात्राओं का इतिहास कुछ ऐसा विकट...

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लिखावट

कुछ दिनों पहले एक मीटिंग में किसी को फाउंटेन पेन से लिखते देखा। हरे रंग की स्याही। घुमावदार लिखावट - कैलीग्राफी जैसी । मुझे ठीक ठीक याद नहीं इससे पहले मैंने ऐसी लिखावट कब देखा था। बहुत अच्छा सा लगा। कई...

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सैंयाजी के मालूम (पटना २१)

शनिवार की शाम ऑफ़िस कॉम्प्लेक्स लगभग खाली हो चुका था. दिन भर चहल पहल से भरी रहने वाली सीढ़ियों से उतरते हुए सन्नाटा अजीब सा लगा. बाहर निकल कर मैं सड़क के किनारे टहलने लगा. मेरे पास वक़्त इसीलिए था क्योंकि...

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न चोरहार्यं न च राजहार्यंन...

मैं लगभग कैशलेसइंसान हूँ. मुद्राहीन - चैन से रहने वाला !*(*शर्ते लागू)पिछले कई सालों से कभी मेरे जेब में नोट या सिक्के रहे हो... और वो भी एक दिन से ज्यादा के लिए - मुझे याद नहीं. यात्राएं अपवाद रही. इस...

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एथेंस (यूनान ४)

किसी नई जगह जाने पर सबसे पहले वो बातें ध्यान में आती हैं जो बाकी जगहों से थोड़ी अलग होती हैं. उन बातों से फ़टाफ़ट किसी देश के बारे में धारणा बनानी चाहिए या नहीं वो तो पता नहीं  पर...चर्च, सुट्टा और...

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